विशेष

विशेष ;

धन्य हो प्रधानमंत्री जी ? 
गुजरात में तो श्मशान घाट बना ही दिया था, उत्तर प्रदेश में भी बनाने की योजना क्यों बना रहे हैं ? अरे ! आप को यूपी के बनारस ने ही सांसद बनाया है उत्तर प्रदेश ने लोकसभा में आपको 73 सीटें दी हैं ? क्या किया आपने ? कम से कम से श्मसान तो न बनाइए ?
वैसे काशी तो घाटों की नगरी ही है जिसमें अधिकांश घाट पर श्मशान घाट हैं ही ?
माननीय साथ ही आपकी नजर बड़ी तेज हैं जब आप ने बसपा को "बहिन जी संपत्ति पार्टी" बना दिया आप के स्वभाव में मुझे मसखरे वाली भाजपाई जमात की छवि तो दिखती ही थी हेरफेर की संस्कृति तो कोई आपसे सीखे ? 
हैं न धन्य है न आप .
आपके आचरण (आचरणों) का अमल छोटे-छोटे बच्चे करने लगे हैं आपकी तरह ही वह लोगों को बेवकूफ बनाते हैं ? और हाऊ हाऊ करते हैं धन्य हैं प्रधानमंत्री जी अब देश का प्रधानमंत्री बनने के लिए तौर तरीकों की जरूरत नहीं है, बल्कि आपने तो सबके लिए रास्ता खोल दिया है कितना भी कोई कैसा भी हो उसको लोग चुन ले रहे हैं, और आपके अध्यक्ष जी को तो सारा देश देख रहा है. कितना शातिर जो निरंकुश राजा, लूटेरे, आततायी की छवि से विभूषित नज़र आ रहा हो ? उसकी भी खूब पहचान बन रही है ? अब यहाँ का चरित्र उनकी राह पकड़ने वाला है ? जब इस देश में डकैत उन्मूलन का दौर मा. वी. पी. सिंह जी उ. प्र. के मुख्यमंत्री रहते चलाये थे, काश आज वह योजना चल रही होती तो इस तरह के लोग उत्तर प्रदेश में उस अभियान के तहत जरूर आ जाते ।
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आदरणीय परम मित्रों !
(आपकी वाजिब और ज़रूरी राय के लिये)

जो नहीं जानते कि उर्मिलेश की जाति क्या है ? पर उन्हें उर्मिलेश की जाति जानने की ज़रूरत ही क्या है ? रही बात पत्रकारिता की तो और कितनों की जातियॉ हैं जो आपको बेचैन करती है ?
सुश्री अनुप्रिया हों, स्वामी प्रसाद मौर्य हों या अम्बिका चौधरी हो उन्हें / इन्हें इधर या उधर क्यों जाना पड़ा ? श्री बलराम यादव जी का सर्जिकल आपरेशन ?
अब आप सबको सत्ता लोलुप कहेंगे जाहिर है क्योंकि उनको यहाँ रहने ही नहीं दिया गया यहाँ तो वही बचे हैं न जो "सत्ता लोलुप नहीं हैं" किसी को भी बेदखल करके देखिये वह कितने दिन आपके साथ रहेगा ? सामाजिक न्याय या जातीय स्वाभिमान आपको कहीं रोके हुए है, हमें नाराजगी है की यादवो के नेता दूसरा कैसे हो सकता है ?
क्या हम कभी यह विचार नहीं कर सकते की वे आपको नेता क्यों मानेंगे ? यदि आप में इतना सहस नहीं है की आप उन्हें अपने साथ जोड़े रख सकें ! मैं यहाँ बहुतेरे नामों का उल्लेख नहीं करना चाहता केवल कुछ यादवों के नाम लिखता हूँ जिनमे श्री चंद्रजीत यादव (पूर्व केंद्रीय मंत्री भारत सरकार) श्री राम नरेश यादव (पूर्व मुख्यमंत्री व् राज्यपाल) श्री शरद यादव (पूर्व केंद्रीय मंत्री भारत सरकार) क्या यह इतने भी महत्त्व के नहीं हैं जो सामाजिक न्याय को दिशा नहीं दे सकते या थे ? जबकि सबसे पहले 15 % आरक्षण श्री राम नरेश यादव (पूर्व मुख्यमंत्री उ० प्र०) ने दिया उसके लिए उन्हें कितनी गालियां खानी पड़ी थीं, याद तो होगा आपको ?
आज बहुतेरे यादव माननीय मुलायम सिंह यादव के खिलाफ हैं, आख़िर क्यों ?
मुलायम सिंह यादव पर परिवारवाद का आरोप लगता है पर अखिलेश यादव तो उसी परिवारवाद की उत्तपत्ति हैं, आप यह क्यों भूलते हैं चौधरी चरण सिंह के पुत्र अजीत सिंह जी ने अपनी राजनीती के लिए जो कुछ किये अंततः "जाट" उनके साथ नहीं रहा ? बल्कि इस इलाके में जाटों ने तो भाजपा जैसी साम्प्रदायिक पार्टी का वरन कर लिया ?
अखिलेश जी उत्तर प्रदेश का जिस तरह का विकास कर रहे हैं उसमें मूलतः ब्राह्मणवादी विकास ही है जो उनको भले बड़ा करता हो पर सामजिक न्याय की अवधारणा से उसका कोई मतलब नहीं है ? केवल यादव ही नहीं है सामाजिक न्याय का हिस्सा है बल्कि सारे पिछड़े उसके हकदार हैं, उन्हें नेतृत्व का मौक़ा क्यों नहीं मिलना चाहिए ?
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Dr.Manaraj Yadav 

डॉ० रत्नाकर जी जिन यादव नेताओं का नाम आप ले रहे हैं उनमें से दो लोगों ने क्रमशः जनवादीपार्टी और समता पार्टी बनाई! लेकिन जनता ने उन्हें समर्थन नहीं दिया! इसमें मुलायम सिंह दोषी हैं या जनता ! शरद यादव को राजनीति में स्थापित करने के लिये मुलायम सिंह और लालू प्रसाद यादव ने बहुत कुछ किया लेकिन वे दोनों से अलग हो गये,नीतीश की गोद में गये और अपमानित हुये,अध्यक्ष पद से हटाये गये इसमें किसका दोष है! मैं मानता हूँ कि मुलायम और अखिलेश ब्राह्मणवादी हैं, तो क्या मायावती ब्राह्मणवादी नहीं है? क्या वे इस वाद को बढ़ावा नहीं दे रही हैं? क्या उन्होंने अकेले ब्राह्मणों को ६६/टिकट नहीं दिया है? क्या यादवों की जनसंख्या ब्राह्मणों से.चार-पांच गुना अधिक नहीं है? क्या उन्हें २३/ टिकट देना उचित है? सवर्णों को ११३/टिकटऔर लगभग ६०%आबादी वाले पिछड़ा वर्ग को १०६ टिकट देना उचित.है? किस आधार पर मायावती को बेहतर माना.जाय !अनुप्रिया पटेल, स्वामी प्रसाद मौर्य अबिका चौधरी की अब अपने नये दलों में.क्या.हैसियत है उन्हें अभी या कुछ दिनों बाद पता चल जायेगी, बसपा.से एक दर्जन से.अधिक केवल यादव नेता बेइज्जत करके निकाले गये हैं! 
सबसे पहला शिकार हुये श्री राम कृष्ण यादव हुयेजो मायावती के साथ दूसरे एम.पी लोकसभा में थे,,बसपा से! अब आप बताओ कि मायावती का.समर्थन कैसे किया जाय!

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