उससे निकलना या निकालना कितना संभव है ?
यह तय नहीं हो पा रहा है वर्तमान में ?
यही भारतीय राजनीती का चक्रव्यूह है।
यह चक्रव्यूह कौन तोड़ेगा प्रश्न यह है ?
आपके लिए, हमारे लिए और उनके लिए !
जो संविधान के साथ हैं और लोकतंत्र बचाना चाहते हैं।
या वे जो गलतफहमी में है की वह राजा है ?
राजनीति में राजतन्त्र और लोकतंत्र का युद्ध है।
कोई जरुरी नहीं विपक्ष सत्तापक्ष के खिलाफ हो ?
हो सकता है अपनी सत्ता के इंतज़ार में ?
बहुत सारे समझौते कर रहा हो ?
आइये यह विचार करें कि
भविष्य की राजनीती किस करवट बैठेगी
भविष्य की राजनीती किस करवट बैठेगी
-डॉ लाल रत्नाकर
















