नए भारत में क्या नया होने जा रहा है !
या होता जा रहा है निरंतर इस देश में.
सैकड़ों साल से खोद रहा था मुल्क को
क्या आप देख पा रहे हैं हाँ या नहीं ?
मुझे यह दिख रहा है सीधी आँखों से !
जो इस देश की अवाम को लुभा रहे थे !
लुभा रहे हैं झूठ से, जुमले और धर्म से !
जाति-पांत के भेदभाव की राजनीती से।
लूट खसोट के व्यवहार और विचार से।
संघ के सवाल पर मनुवाद के हाल पर।
कौन सोच रहा है लोकतंत्र के हाल पर !
-डॉ लाल रत्नाकर




















