गांधी स्मृति में संघ का आदमी बैठाया गया है .
-----------------------------
कौन समझ रहा है
उनका सच जो जहर है
जिसे वह पी रहा है
मगर मर नहीं रहा है
लोगों को मार रहा है
जहरीले आचरण से।
हजारों साल की विरासत को ।
बाट रहा है साझी
संपदा को।
उसे शर्म नहीं आती!
वह जहर समेटे है।
पूरे आचरण में।
वह नहीं जानता?
विरासत क्या है।
उसकी विरासत चरित्रहीनता का है।
कौन नहीं जानता।
यह भी एक वैज्ञानिक
विश्लेषण है।
इसलिए मर नहीं रहा है।
-डॉ लाल रत्नाकर

















