लोक सभा में जो बैठा है
वह संविधान के खिलाफ है
लोकसभा भी नई है
और इसको बनाने वाले
भारतीय लोकतंत्र के विरोधी है
जो खुले आम कहते हैं
कि वह संविधान नहीं मानते
लोकतंत्र विरोधी है वे मनुवादी !
मनुवाद का मुखौटा संविधान !
संविधान की करता बात है !
उसके मन में विश्वासघात है ?
रोज़ करता संविधान संसोधन !
जो है संविधान के खिलाफ !
निष्प्रभावी बनाता है संविधान को !
मनुवाद के आधार पर परिवर्तन ?
ही उसका संविधान संशोधन है।
आवरण संविधान का परिवर्तन !
मनुवाद का जो बहुजन नहीं समझता ?
क्योंकि उसे फसा रखा है भगवान् में !
संविधान उसका धर्म है वह नहीं जानता !
पाखण्ड में अटका हुआ है !
अंधविश्वास में लटका हुआ है !
चमत्कार और झूठ से बंधा हुआ है !
यही उसपर अत्याचार है,
जिसे वह नहीं जानता ?
लोक सभा में जो बैठा है
वह संविधान के खिलाफ है
-डॉ. लाल रत्नाकर




















