क्या एक अन्ना की और जरुरत है।
जरूरत है ऐसे अन्ना की जो भाग न जाए।
खड़ा रहे अपने वादों के साथ !
अन्यथा उसके विकल्प की तलाश जरुरी है।
प्रदेशों के नेताओं के पास राज्यसभा वाले।
पदलोलुप नेताओं की भरमार है ?
हालांकि नेता होशियार है ?
उसे ऐसे जगहों पर अपने शत्रुओं को भेजना है।
चाहे अनचाहे ऐसा मकड़जाल है।
हमने देखा है ऐसे नेता को जिसको सदन में,
होना बहुत जरुरी था जो उनकी रक्षा करते !
लेकिन उन्हें नहीं भेजा, भेजा अपने वर्ग शत्रु को !
इसलिए अन्ना को ढूढ़िये और पूछिए ?
उनके अपने मन को मन की व्यथा को !
वह ऐसा क्यों न कर सके पता करना है ?
जरूरत है ऐसे अन्ना की जो भाग न जाए।
खड़ा रहे अपने वादों के साथ !
अन्यथा उसके विकल्प की तलाश जरुरी है।
प्रदेशों के नेताओं के पास राज्यसभा वाले।
पदलोलुप नेताओं की भरमार है ?
हालांकि नेता होशियार है ?
उसे ऐसे जगहों पर अपने शत्रुओं को भेजना है।
चाहे अनचाहे ऐसा मकड़जाल है।
हमने देखा है ऐसे नेता को जिसको सदन में,
होना बहुत जरुरी था जो उनकी रक्षा करते !
लेकिन उन्हें नहीं भेजा, भेजा अपने वर्ग शत्रु को !
इसलिए अन्ना को ढूढ़िये और पूछिए ?
उनके अपने मन को मन की व्यथा को !
वह ऐसा क्यों न कर सके पता करना है ?
-डॉ.लाल रत्नाकर


















