आग और पानी दिल की कहानी
कितनी पुरानी यादें हैं हमें गिनानी।
कितनी पुरानी यादें हैं हमें गिनानी।
जो गुजारी है हम पर और उनपर।
किसकी कहानी है कितनी बतानी
और कितनी छुपानी अपनों से परायों से
आज की पीढ़ी को, सीढ़ी को उठानी है
जहाँ चाहें लगानी है वहां से हटानी है।
हमारी पीढ़ियां उलझी है विवादों में !
उनकी नफ़रत की सीमा नहीं होती !
दिल के झटके को करीने से बचाना है
वो शातिर है बहुत माहिर सभी को जलाने में
नहीं मरता अभी वह तो खतरा बहुत ही है
वो शातिर है बहुत माहिर सभी को जलाने में
नहीं मरता अभी वह तो खतरा बहुत ही है
आग और पानी सी दिल की कहानी।
कितनी भी पुरानी यादें गिनानी हमें हैं।
कितनी भी पुरानी यादें गिनानी हमें हैं।
उनकी धारा हमारी धारा से धरासाई।
- डॉ लाल रत्नाकर




















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