मंगलवार, 14 जुलाई 2026

मैं नहीं कहता उसको टिकट मत दो ।

 


मैं नहीं कहता उसको टिकट मत दो ।
मैं केवल इतना कहूँगा कि यह?
हमारे जनप्रतिनिधि के लायक़ नहीं है ।
यह पूरे क्षेत्र को बर्वाद कर रहा है ।
यह क्षेत्र विकास के रास्ते से भटक गया है ।
मगर इसमें कौन सी खूबियाँ दिखाई देती हैं ।
यह बात हमारी समझ नहीं आती ।
जिसको आप समझ रहे हैं या देख रहे हैं ।
हो सकता है आप मेरी बात न माने ।
मगर मैं यह जानता हूँ परिणाम आने पर 
शायद यह कहें की उसकी जगह 
किसी और को लड़ाया होता तो जीत जाता ?
ऐसा इसलिए होता है कि उसकी बुराईयां 
समय से नज़र नहीं आती ॥
मैं कह रहा हूं ऐसा चयन जनता को आश्वस्त नहीं करेगा ॥
जनता की हताशा बहुत खतरनाक होती है।
शायद यह भ्रम कहीं घर कर गया है।
कि यह वक्त अब भले लोगों का नहीं रहा ?

- डॉ लाल रत्नाक

मेरी आने वाली इस किताब में उसका ज़िक्र जरूर होगा :


मेरी आने वाली इस किताब में
उसका ज़िक्र जरूर होगा :
जो
बदतमीज़
घमण्डी 
अनुभवहीन 
क्यों है?
इसका मूलभूत कारण
परिवारवाद है !
वह परिवार कोई भी हो सकता है !
व्यापारी का परिवार हो !
पुजारी का परिवार हो !
चोर का परिवार हो !
डकैत का परिवार हो !
गद्दारी वही होती है जहां 
नासमझ और मक्कारी होती है !
मुफ्तखोरी होती है !
जिम्मेदारी नहीं होती !
विचारधारा की कोई भी !


-डा.लाल रत्नाकर

मौन की शक्ति बहुत तगड़ी है।


मौन की शक्ति बहुत 
तगड़ी है।
जो अपने को कहते हैं कि,
वह समझ में अगड़े हैं।
वह विचारों में बहुत पिछड़े हैं। 
मौन रहने का यह मतलब नहीं होता। 
कि हम सच से वाकिफ नहीं है। 
मगर इतनी पेचों में जकड़े हैं।
न जाने क्यों इतने
अकड़े हैं।
हो सकता है कोई नया 
राह खोज रहे हों !
जब कानून कानून की तरह 
काम नहीं करता
तब तब अवाम कानून ख़रीदती है।

- डॉ लाल रत्नाकर 

पहले इंसान फिर ज्ञान !

 


पहले इंसान
फिर ज्ञान !
फिर रोज़गार 
राजनीति 
समाजवाद
जनकल्याण 
मुक़ाबला
बेईमानों से
संगत 
ईमानदार से
हौसला 
सच कहने का 
काले को 
मुँह पर काला कहना
धर्म को धर्म की तरह मानना
अधर्म के ख़िलाफ़ खणा होना
अखंड पाखंड अंधविश्वास
को समझना और समझाना
जब आपका वसूल बन जाए
तब राजनीति में आना
और संविधान लोकतंत्र
सामाजिक न्याय
पर बात करना।
अंदर से पाखंडी 
स्वभाव से घमंडी 
कैसी राजनीति करोगे
पार्टनर।

- डॉ लाल रत्नाकर

असभ्यता का दौर चल रहा है।

 

असभ्यता का दौर चल रहा है। 
असभ्यता सभ्यता पर भारी है। 
असभ्यता को कौन कौन
शक्ति दे रहे हैं। 
उनकी सूची बहुत बड़ी है। 
आपका नाम उसमें है कि नहीं है। 
यह मैं नहीं बता सकता। 
लेकिन मेरा नाम उसमें नहीं है !
यह मैं जानता हूं। 
असभ्यता से मुकाबला करना।
सभ्यता की जिम्मेदारी है। 
धर्म और अधर्म की
पूंजीवाद की समाजवादी
संस्कृति में जगह कहाँ है।
सभ्यता में असभ्यता की ।
खोज करने की !
किसकी जिम्मेदारी है। 
लड़ने चले हैं गद्दारों से गद्दार।
गद्दारों की कैसी मारामारी है। 
यह किसके प्रति वफादार हैं।
यह पता करना आसान नहीं है।
यही तो नक़ली वफादारी है। 
विचारधारा के प्रति गद्दारी है !
हौसलें टूट जाते है वफादारों के !
गद्दारों की पहचान भारी है!

-डॉ लाल रत्नाकर 

सोमवार, 6 जुलाई 2026

कौन समझ रहा है उनका सच जो जहर है

गांधी स्मृति में संघ का आदमी बैठाया गया है .
-----------------------------


कौन समझ रहा है 
उनका सच जो जहर है 
जिसे वह पी रहा है 
मगर मर नहीं रहा है 
लोगों को मार रहा है 
जहरीले आचरण से।
हजारों साल की विरासत को ।
बाट रहा है साझी
संपदा को।
उसे शर्म नहीं आती!
वह जहर समेटे है।
पूरे आचरण में।
वह नहीं जानता?
विरासत क्या है।
उसकी विरासत चरित्रहीनता का है।
कौन नहीं जानता।
यह भी एक वैज्ञानिक 
विश्लेषण है।
इसलिए मर नहीं रहा है।

-डॉ लाल रत्नाकर 

गुरुवार, 18 जून 2026

फ़ॉर्मूले पुराने हैं !


धंधे में जो अंधा है
वह कौन बहादुर बंदा है
आओ उसके बारे में
चर्चा और परिचर्चा करें ।
डरो नहीं मरो नहीं, 
ज़िंदा रहकर लड़ो नहीं !
गफलत में तुम पड़ो नहीं,
बेईमानी की राह पर चलते रहो 
राह बदलने को हम नहीं कह रहे
चलते रहो, चलते रहो !
कहॉ तक चलोगे !
जब ऊपर चले जाओगे !
सब यहीं पर रह जाएगा।
तुम्हें कोई याद भी नहीं करेगा !
क्योंकि याद के लिए!
फ़ॉर्मूले पुराने हैं !
चरित्र
ईमानदारी 
कर्तव्य परायणता 
निष्ठा
सत्य!
शांति, 
सहयोग और 
मानवीय सहायता  
मनुष्यता 
का सम्मान करता है।
बेईमानी की राह पर चलते रहो 
राह बदलने को हम नहीं कह रहे
चलते रहो, चलते रहो !
कहॉ तक चलोगे !
-डॉ. लाल रत्नाकर 

मंगलवार, 9 जून 2026

किसने तोड़ा उस तार को ढूढ़िये ज़रा ? औरतों ने ?


किसने तोड़ा उस तार को ढूढ़िये ज़रा ?
औरतों ने  या उनके बहाने तुम्हारी चालाकी ने 
केवल तुम किरदार थे उस परिवार के 
जिसे गढ़ा था त्याग और तपस्या से उस संत ने 
जिसने हमारे लिए सपने बुने थे सदाचार के 
आदर्श और ज्ञान के, गौरवशाली अभिमान के 
जिसे उसने निगल लिया सुरा के गिलास में 
और निर्वासित कर दिया उस युवा को 
जिससे उसको डर था वह खड़ा हो जाएगा 
उसके सामने,मैं देख रहा था उसकी शातिर 
नियति और चालबाजियां, पर लाचार था !
उसके कुकर्मों से मर्यादा बचाये रहने में !
भविष्य को गढ़ने में और अपने गहनों में। 
अंधा समाज मौन था यह कहने में शातिर !
कौन था ?

-डॉ. लाल रत्नाकर 

जो सपने बुने थे आज साकार हो रहे हैं


जो सपने बुने थे आज साकार हो रहे हैं। 
हमें बनवास मिला था जो बाज़ार हो रहा हैं। 

दिन के खूबसूरत लमहे और रात की वीरानगी 
बाज़ार की आहट बेरोजगार की कड़वाहट। 

धोखेबाज़ों की तिज़ारत और हमारी ईमानदारी 
बेचारगी की हालत और परिवारों की जलालत 

समाजों की टूट और परम्पराओं की लूट 
जो खोखला कर चुकी है रवायतों का रसूख। 

भरोसे का भरोसा देकर धोखेबाज़ी के कारनामें 
नज़रों में ही नहीं नज़ारों में तब्दील हो गए है। 

जहाँ प्यार मोहब्बत का सरोकार होना था 
वहां सम्बन्ध उधार के व्यापार हो गए हैं। 

-डॉ लाल रत्नाकर 

मंगलवार, 26 मई 2026

मौसम में भी ताप है .


मौसम में भी ताप है 
संबंधों का अभिशाप है 
रास्ता जितना जटिल है 
पर सत्य उतना अटल है 
समस्या जटिल है। 
सरकारी दफ्तरों का 
कर्मचारी बेईमान है 
कर्तव्य से हैवान है। 
अपने उत्तरदायित्व के लिए 
कितना जिम्मेदार है !
यह कैसा इंसान है। 
जो गर्मी में भी शांत है। 
उसका मस्तिष्क क्लांत है। 
ऐसा लग रहा है जैसे सबकुछ शांत है। 
धूर्तता में कितनी जान है 
वह कितना महान है। 
उसको यह नहीं पता ?
आने वाली पीढ़ियों पे 
उसका कितना असर है। 
उसको नहीं पता है। 
की वह किसको ठग रहा है। 

-डॉ लाल रत्नाकर  

शनिवार, 23 मई 2026

क्या एक अन्ना की और जरुरत है।

 
क्या एक अन्ना की और जरुरत है। 
जरूरत है ऐसे अन्ना की जो भाग न जाए। 
खड़ा रहे अपने वादों के साथ !
अन्यथा उसके विकल्प की तलाश जरुरी है। 
प्रदेशों के नेताओं के 
पास राज्यसभा वाले। 
पदलोलुप नेताओं की भरमार है ?
हालांकि नेता होशियार है ?
उसे ऐसे जगहों पर अपने शत्रुओं को भेजना है। 
चाहे अनचाहे ऐसा मकड़जाल है। 
हमने देखा है ऐसे नेता को जिसको सदन में,
होना बहुत जरुरी था जो उनकी रक्षा करते !
लेकिन उन्हें नहीं भेजा, भेजा अपने वर्ग शत्रु को !
इसलिए अन्ना को ढूढ़िये और पूछिए ?
उनके अपने मन में उनके मन की व्यथा को !
वह ऐसा क्यों न कर सके? 
पता करना है ?
क्या एक और अन्ना की जरुरत है। 
जरूरत है ऐसे अन्ना की जो भाग न जाए। 
खड़ा रहे अपने वादों के साथ !

-डॉ.लाल रत्नाकर 

गुरुवार, 21 मई 2026

मुसलमान का मुल्क यही है




मुसलमान का मुल्क यही है 
जो पाकिस्तान बता रहे हैं वह मूर्ख हैं 
कैसे किसने कहा था बटवारा करो !
बटवारा किसका किसका करोगे ?
किसने इतने बड़े भू भाग को बांटा !
धर्म के नाम पर ?
फिर जाती के नाम पर बटवारा क्यों नहीं हुआ ?
जब एक ही जाती के लोग !
पंचानबे फीसदी अधिकार हथियाये हुए हैं क्यों ?
यह फैसला कौन करेगा और कब ?
संविधान में लिखा है बराबरी का हक़ 
किसने रोका है और कब से कब तक !
जो मनुस्मृति की बात कर रहे हैं !
वह जानते हैं उसमे बराबरी नहीं है। 
मुर्ख बहुजन समझ नहीं रहे हैं अपना हक़ 
दलितों के दुश्मन बने हुए हैं !
मुसलमान से नफ़रत करा रहे हैं। 
किस मुसलमान ने हड़पा है आपका हक़ ?
मुसलमान को दुश्मन बनाकर !
बहुजनों को गुलाम बनाये रखने की साजिश !
कब समझोगे मूर्ख बहुजनों ?

-डॉ लाल रत्नाकर 

बुधवार, 20 मई 2026

यह शहर है जहॉ पत्थरों को तराशा है देशभर के नामचीन शिल्पकारों ने!

 

यह शहर है जहॉ पत्थरों को 
तराशा है देशभर के 
नामचीन शिल्पकारों ने!
शायद उन्हें नहीं पता !
की यह बेशक़ीमती हैं 
इस शहर के इतिहास में 
मौलिकता की मिसाल है
एक अदद गौरवशाली 
परंपरा के पाषाण हैं ।
औद्योगिक शहर के 
मस्तक के तिलक हैं
कला के प्रतिमान है
उस युग के निशान हैं 
भव्यता की पहचान हैं 
ज्ञान और विज्ञान के प्रतिमान हैं 
हम सभ्य हैं उसकी पहचान हैं ।
शान्ति समृद्धि नैसर्गिक 
जीवंतता की थाती हैं ।
यह मेरे शहर की अद्भुत शान है
इसकी कल्पना के पीछे 
त्याग और समर्पण का 
संचित संकल्प है ।
यह केवल पत्थर नहीं है !
उसमें से निकलता हुआ 
बौद्धिकता का विन्यास है!
साहित्य संगीत कला का जीवंत 
पहचान है ।

-डॉ लाल रत्नाकर 

यह श्रमणों का देश, ऐसा यहां संदेश।

 

यह श्रमणों का देश,
ऐसा यहां संदेश।
जीवन के मोड़ों पर। 
महापुरुष मिले 
किया अनुसरण जिनका। 
मगर ठगों के बेस में,
अपने ही परिवेश में, 
मिले बहुरूपिये के वेश में ।
जब तक उन्हें पहचानें
ठगी कर गए अनेक ।
उनको क्या-क्या नाम दूं या नाम लूं।
यह सवाल जो बना हुआ है। 
उत्तर है अनेक?
जो समाज बारात के लिए 
सजा हुआ है। 
क्या उसको पता है ?
'बाराती का मूल्य ?
एक प्लेट भोजन होता है। 
स्वाद के लिए कुछ और व्यंजन।' 
उसका कर्मकांड से 
पाखंड से अंधविश्वास से। 
चमत्कारिक संबंध होता है। 
वह नहीं समझता। 
जीवन के मूल्यों को। 
क्योंकि उसका विश्वास है,
ठगों के आसपास।
चक्कर काटता रहता है।
ऊन ठगों को प्रणाम।
साधुबाद कि उन्होंने 
ठगों पर नियंत्रण बनाए रखा है।
जो हैं आपके आसपास।
परिवर्तन तो चाहते हैं। 
लेकिन ठगी में।

-डॉ.लाल रत्नाकर

हम गए थे गाँव में शादी कराने को !

 
हम गए थे गाँव में
शादी कराने को !
पहले हुआ बहुत विरोध !
फिर जब शादी हो गई।
तो सब ने माथे चढ़ा लिया!
बुड्ढे जवान सबने
अब मन बना लिया 
हम भी करेंगे शादी 
अब इसी रीति से !
न्योता मिला है ।
आगे की शादियों के लिए
सब ने महसूस किया
यह शादी बहुत भली है
न रात का झंझट है
न यजमान की ठगी है।
न पाखंड का कोई चक्कर
यहॉ सब कुछ खुला खुला है
वर वधू का प्रतिज्ञापन ।
फिर जयमाल से हो शादी
न समय की बर्बादी
न पाखंडियों की सौदेबाजी ।
संविधान की उद्देश्यिका
का वर बधू करे वाचन।
साक्षियों के समर्थन से ।
पूरी हो यह शादी।
वर वधू के हाथ में 
प्रमाण पत्र देकर ।
पूरा कर दिया है,
नव दंपति का संकल्प॥
अब वाह वाही मिल रही है।
चारों तरफ़ से खूब!
अर्जक संघ का यही है!
बहुजनों तुम्हें संदेश।
पाखंड अंधविश्वास से
बचाना है अपना परिवेश।
चमत्कारियों की यहॉ
खुल गई है अब पोल 
चारों तरफ़ बज रही
ख़ुशियों की शहनाई और ढोल।

-डॉ. लाल रत्नाकर

आईए अब मिलकर नाकामियों को गले लगा लें।

 

आईए अब मिलकर 
नाकामियों को गले लगा लें।
अपने उन्हीं साथियों से आंखें चुरा लें।
लड़ने की हिम्मत नहीं है।
इंसाफ के लिए।
डर को गले लगा लें।
शोहरत अपनी बढ़ा लें।
नफरत को भी छुपा लें।
हिंदू मुसलमान के बीच। 
कल तक यही थे ?
मेरे इतने अपने और अजीज।
आज उनसे इतनी दूरी 
क्यों बढ़ा लें।
ऐसा क्यों कर रहे हो।
दूरी क्यों बढ़ा रहे हो। 
यह मुल्क सब ने बनाया है। 
यह क्यों भूल रहे हो।
मनुष्यता का दुश्मन ।
वो सदियों से रहा है। 
सब में फूट डालकर जो लूट रहा है।
लोकतंत्र के लिए !
संविधान ने सब कुछ समझाया है।
यह मंत्र बताया है। 
इसीलिए संविधान ही धर्म हमारा है। 
यह तय करना होगा। 
हिंदू मुस्लिम सभी बचेंगे। 
जब यह नारा होगा। 
और बहुजन की आवाज उठेगी। 
भागेगा दुश्मन। 
यह बिल्कुल माकूल दवा है। 
हमें यही आवाज उठाना है।
यदि मुल्क बचाना है। 
सबको यही समझाना है।

-डा.लाल रत्नाकर 

शनिवार, 9 मई 2026

फलानी जी लड़ रही हैं -



उन्हें शर्म नहीं आती 
यह कहते हुए ; 
फलानी जी लड़ रही हैं -
पर सच क्या है 
क्या वह नहीं जानती 
तो सुनो कान खोलकर 
सबसे पहले उन्होंने 
बाबा साहब अंबेडकर के 
रास्ते को छोड़ा, 
काशीराम के रास्ते को छोड़ा 
और बहुजन की बजाय 
सर्वजन किया ?
किस दुनिया में हो 
और किस गुफा में सो रहे हो। 
निकलो आँखें खोलो 
वह जलालत को सह रही हैं। 
आत्मविश्वास मर चुका है। 
जागो बहुजन जागो।
मोह माया त्यागो !

-डॉ लाल रत्नाकर 

गुरुवार, 7 मई 2026

नए भारत में क्या नया होने जा रहा है !

नए भारत में क्या नया होने जा रहा है !
या होता जा रहा है निरंतर इस देश में.
सैकड़ों साल से खोद रहा था मुल्क को 
क्या आप देख पा रहे हैं हाँ या नहीं ?
मुझे यह दिख रहा है सीधी आँखों से !
जो इस देश की अवाम को लुभा रहे थे !
लुभा रहे हैं झूठ से, जुमले और धर्म से !
जाति-पांत के भेदभाव की राजनीती से। 
लूट खसोट के व्यवहार और विचार से। 
संघ के सवाल पर मनुवाद के हाल पर। 
कौन सोच रहा है लोकतंत्र के हाल पर !

-डॉ लाल रत्नाकर 



सोमवार, 4 मई 2026

लड़कियां खूबसूरत होती हैं

लड़कियां खूबसूरत होती हैं 
लडके भी इतने बुरे नहीं होते !
पर उनकी खूबसूरती का क्या ?
जो ईर्ष्यालु और नफ़रत से लबरेज हों 
सुकोमल कलियाँ नहीं कांटे हों 
कांटे की तरह चुभते हों !
मन में अविश्वास और फितरत पाले हों !
सुंदरता के मतवाले हों गले में 
सर्प डाले हों और जहरीले नयन !
प्रकृति के खिलाफ जहर उगल रहे हों !
आडम्बर में नग्न और निराले हों !
संसार में सुख और दुःख का माप तौल !
खुद के हानि लाभ से करते हों ?
किसी का हक़ किसी का गला,
काटने में उन्हें कोई परहेज़ न हो !
यही उनकी खूबसूरती में बाधक है। 

-डॉ लाल रत्नाकर 






शुक्रवार, 1 मई 2026

बंगाल की अपनी संस्कृति है

 बंगाल की अपनी संस्कृति है 
अन्य प्रदेशों के शातिर से शातिर ठग 
वहॉ सफल नहीं हो सकते ?
उस संस्कृति के परिवर्तन का कोई सवाल नहीं है। 
क्या है किसी भी पार्टी की मानसिकता!
ज़रूरी नहीं है वह जो कुछ कह रही है।
कितना भरोसा किया जा सकता है।
जिसकी मानसिकता ही विश्वासघाती है।
जनता यह जानती तो है पर मानती कहाँ है।
उनका कोई हक ही नहीं बनता ।
जो कुछ कह रहा है उसे मानने की। 
समाज में परिवर्तन की बात करने में। 
क्योंकि वह लोकतंत्र को नहीं मानते ?
चुनाव में वह नहीं केंचुआ लड़ रहा है ?
एक अकेली महिला से जो चिल्ला रही है 
एक अकेली महिला जो ललकार रही है !
ऐसे हालात में पूरा मुल्क दुत्कार रहा है ।
पर जीत को हड़प कर जश्न मना रहा है। 
सर्वत्र उसके गुंडे आग लगा रहे हैं। 
बंगाल की स्मिता को मिटा रहे हैं। 
क्योंकि अब तक बंगाली बंगाली था। 
जिसे हिन्दू और मुसलमान बना दिया ?
जातिवाद की आग लगा दिया !

-डॉ. लाल रत्नाकर