शुक्रवार, 2 जनवरी 2026

आतंकवाद !

 

आतंकवाद ! 
की बहस रुक गयी है क्या ?
सुनाई नहीं पड़ता अब आतंकवाद ! 
कौन है वह आतंकी या आतंकवादी ! 
कहाँ चले गए वह देश छोड़ कर ? 
उनकी पहचान धर्म, जाति, राष्ट्रवाद ! 
हुआ करती थी, जो पृष्ठभूमि में चली गई है 
और उसे डरावना बना दिया गया है !
परंतु वह छाया आम आदमी की 
स्मृति में कायम है अखण्ड पाखण्ड की तरह ! 
जिन्हें डरा दिया गया है क्यों ? 
क्या उनका इस देश के संविधान में 
इस देश की खुशहाली में 
इस देश के उद्योग धंधे में 
या सांस्कृतिक विरासत बचाने में 
अपने लिए श्रम से रोटी कमाने में 
कोई विश्वास नहीं है 
या कोई योगदान नहीं है !
क्योंकि जो अपराधी और 
सीनाजोरी से परोस रहे हैं 
ऐसा अवैज्ञानिक आतंकवाद 
ऐसा पाखण्डवाद, अन्धविश्वास 
और चमत्कार ।
पाखण्डवाद और आतंकवाद में क्या फर्क है ? 
फर्क तो समझने का विचार है ? 
जो बाबा साहब और बुद्ध का आचार है ! 
वही स्वतंत्रता का विचार हमारा संविधान। 
धर्म, जाति, मज़ हब, मानवता के खिलाफ है |
- डॉ लाल रत्नाकर

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