शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

चकमक चकमक जीवन का.


चकमक चकमक जीवन में
ख्वाब बहुत बुनता है वह।
दिखता है जैसा, वैसा होता नहीं।
जीवन के आदर्श नहीं है।
आदर्शों की वह हत्या ही करता है।
लूट खसोट में रहता है।
प्रचार वह पुरे समाज में ऐसा
वह करता है जिससे दीखता
लगता लेकिन संत की तरह।
जबकि रात दिन लूट खसोट में।
लूटपाट से उसका ?
जनम जनम का नाता है।
यही उसे भाता है।
सत्य अहिंसा औरों के खातिर।
अपनी तो बेईमानी है।
उसकी यही कहानी है।
बातें जानी पहचानी है।

-डॉ.लाल रत्नाकर

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