उस फेहरिस्त में
किसका-किसका नाम लिखूं।
अवसरवादियों का?
मददगारों का ?
गद्दारों का?
वफादारों का?
निकम्मों का ?
सदाचारियों का ?
दुराचारियों का ?
निहत्थे गरीब का ?
चलिए शुरू करता हूं -
1
2
3
4
5
6
7
पर सात ही क्यों ?
नौ क्यों नहीं ?
यह भी कोई बात है
आजकल सात भी नहीं है।
बाकी सब तो डरपोक है?
है तो वह अकेला ही।
बाकी सब उसके दोस्त है।
पता नहीं दोस्त है या दुश्मन है।
हम तो बस एक को ही जानते हैं।
पर उसका नाम नहीं लिखेंगे ।
-डॉ लाल रत्नाकर

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