शहर में आकर बेचैन हैं जो ?
अश्क में उनके रश्क भरा है।
यही मनु ने हमें दिया है।
आज तक जो उनको नहीं जानते हैं।
उनके नियमों को मानते हैं !
बाबा ने उस किताब को जला दिया था ,
जिसको हमने बचा लिया था !
उसको आज तक मानते हैं।
बाबा ने अपनी प्रतिज्ञा में।
क्या-क्या कहा है?
क्या पढ़े नहीं हो लिखे नहीं हो।
कैसे जानोगे नफरत की धारा।
चलो बढ़ें और संविधान पढ़ें?
क्योंकि सबसे ज्यादा खतरा
इसी पर बढ़ा है।
समाजवादियों का यह दौर ?
क्या संविधान को जानता है।
अगर जानता है तो क्यो नहीं मानता है?
मैंने देखा है घर-घर में मनुस्मृति को पूजता है।
यह कैसा समाजवाद है अगर अब भी चुप हो।
और चुप रहे तो मरोग खुद ही !
चमत्कार अन्धविश्वास में।
विचारधारा मरेगी पाखंड के प्रकोप से।
अगर अब भी डरे तो।
जल्दी मरोगे मनु की विचारधारा से।
-डॉ लाल रत्नाकर
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अश्क - दया
रश्क - नफ़रत
अगर अब भी डरे तो।
जल्दी मरोगे मनु की विचारधारा से।
-डॉ लाल रत्नाकर
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अश्क - दया
रश्क - नफ़रत

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