शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

विविध समाजों के बच्चे !











विविध समाजों के बच्चे !
कैसे बर्बाद हों यह योजना है !
यही मेरे संघटन का काम है।
यह जिम्मेदारी आज मेरा संगठन। 
बहुत सलीके से उठा रहा है। 

अमीरों के लिए अलग व्यवस्था। 
गरीबों के स्कूल बंद करा रहा है !
उन बंद किए हुए स्कूलों में। 
किसके बच्चे पढ़ते थे। 
इन लाभार्थियों के या और किसी के। 
अब उनकी पढ़ाई लिखाई नहीं होगी। 
उन्हें 5 किलो राशन का झुनझुना। 

और आने वाले दिनों में गुलामी की जिंदगी। 
न जाने फिर ज्योतिबा फुले आएंगे कि नहीं। 
गुलामीगिरि पर कुछ लिखेंगे कि नहीं। 
भक्त तो तुम्हें गुलाम बना कर रखेंगे।

-डॉ लॉल रत्नाकर

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