कैसे बर्बाद हों यह योजना है !
यही मेरे संघटन का काम है।
यह जिम्मेदारी आज मेरा संगठन।
बहुत सलीके से उठा रहा है।
अमीरों के लिए अलग व्यवस्था।
गरीबों के स्कूल बंद करा रहा है !
उन बंद किए हुए स्कूलों में।
किसके बच्चे पढ़ते थे।
इन लाभार्थियों के या और किसी के।
अब उनकी पढ़ाई लिखाई नहीं होगी।
उन्हें 5 किलो राशन का झुनझुना।
और आने वाले दिनों में गुलामी की जिंदगी।
न जाने फिर ज्योतिबा फुले आएंगे कि नहीं।
गुलामीगिरि पर कुछ लिखेंगे कि नहीं।
भक्त तो तुम्हें गुलाम बना कर रखेंगे।
-डॉ लॉल रत्नाकर

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