शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

जो दौर गुजर जाते हैं ……!



जो दौर गुजर जाते हैं ……!
तब वह याद नहीं आते। 
उनकी स्मृतियों से ही ।
काम चला लेते हैं हमलोग !
उनकी स्मृतियां नहीं होती। 
क्योंकि स्मृतियाँ स्मृतियॉ होती हैं !
स्मृतियों पर ?
बहुत लंबी बहस हो सकती है।
पर स्मृतियां स्मृतियां हो तब न।
स्मृतियों को ढाल बनाकर ,
उनकी प्रतिमा लगाकर 
नहीं बनाया जा सकता !
इतिहास ?
जिनका इतिहास देशद्रोह का रहा !
बहाना नहीं बनाया जा सकता। 
स्मृतियों को समझना !
सपने की तरह ही है !
भुलाया नहीं जा सकता।
भूला जा सकता है कुछ समय के लिए ।
बहाना नहीं बनाया जा सकता ।
की इतिहास उन्हें माफ़ कर दिया है। 
क्योंकि उन्होंने उस सत्य की ह्त्या की है ?
जो दौर गुजर जाते हैं ……!
तब वह याद नहीं आते। 
उनकी स्मृतियों से ही ।
काम चला लेते हैं हमलोग !



















डॉ लाल रत्नाकर

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