शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

सुनिए और भूल जाईए।


सुनिए और भूल जाईए।
वक्त गुजर जायेगा और ?
कुछ भी समझ नहीं आएगा।
वह लूटने को तैयार है 
और आप ?
बचाना भी नहीं जानते?
या बचाना ही नहीं चाहते ?

उसके पास भोथरा हथियार है।
और आप में धार भी नहीं ?
विचार भी नहीं।
कोई सरोकार है भी तो लाचार है। 
एक दूसरे की टांग खींचने में,
कामयाब हो हड़पने में लगे हो।
क्योंकि सच से डरे हो।

सच किसी की जागीर नहीं है।
सच सच है और यह नंगा करेगा।
झूठ का सम्राट बनकर !
कब तक ठगेगा वह तू कब जगेगा ढोर !



















-डा. लाल रत्नाकर

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