रविवार, 8 मार्च 2026

तुम्हारे प्रतीकों का अर्थ कितने लोग समझते हैं

 


तुम्हारे प्रतीकों का अर्थ?
कितने लोग समझते हैं 
यह तो नहीं पता ?
लेकिन हमें अच्छी तरह 
समझ में आता है। 
तुम्हारे प्रतिकों में और 
तुम्हारे असली चेहरे में। 
दिन और रात का फर्क है। 
श्वेत और श्याम का फर्क है। 
काले और सफेद का फर्क है। 
फर्क है मनुष्यता का, 
हैवानियत का, जलालत का 
और इंसानियत का। 
तुम किसी भी तरह से 
इंसान नहीं हो सकते। 
भगवान बनने के चक्कर में। 
भगवान नहीं हो सकते। 
भगवान !
भूमि गगन वायु और नीर से बनता है। 
नर तो हो पर नारायण नहीं! 
प्रकृति सबकी जननी है 
उनकी भी जो मुंह से पैदा हुए हैं। 
या जैविक रूप से पैदा नहीं हुए हैं।
एक दिन बिना पानी,
बिना अग्नि बिना वायु,
जिंदा रहकर दिखा दो।
फिर तुम्हारे प्रतीकों पर।
भरोसा कर लेंगे। 
-डॉ लाल रत्नाकर

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