रविवार, 8 मार्च 2026

हजारों साल से जो दुश्मन रहे हैं।


आहत में राहत !
महसूस करने वाले।
जातियों में बंटे हैं।

हजारों साल के 
स्वजातीयों के 
दुश्मन हो गए हैं। 
उन जातियों के साथ। 
गलबहियां कर रहे हैं।
हजारों साल से 
जो दुश्मन रहे हैं। 

जब उनके लोग 
जहर उगलते हैं। 
तो उन्हीं जातियों का 
विरोध करते हैं। 
जिन जातियों ने 
उनकी रक्षा की है।
अब यहां यह 
समझ में नहीं आता। 
उनकी लड़ाई कौन लड़ेगा ?
वह तो उसी सत्ता के 
हिस्से बन गए हैं।
जो उनके विनाश का 
ढांचा तैयार कर रखा है। 
और निरंतर कर रहा है ।

याद आते हैं जगदेव बाबू 
याद आते हैं रामस्वरूप वर्मा, 
याद आते हैं ललई सिंह यादव। 
क्या इसी दिन के लिए 
उन्होंने लड़ा था।
उनमें वह कैसे फिट हो गए हैं। 
यही तो विचारणीय हैं।

क्योंकि एक संघी पत्रकार 
कह रहा था।
बहुजनों और दलितों के 
असली दुश्मन। 
तो यादव है।
वह बहुजन आंदोलन 
को कवर कर रहा था 
तभी आजकल के कथित,
बहुजन बौद्धिक। 
संघ की सेवा में लगे हैं।

- डॉ लाल रत्नाकर

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