झूठ तो सब झूठ था
अंधे तुमने अंधा कर दिया
जो पहले से ही अंधे अंधभक्त थे
अब क्या करोगे !
कटोरा उठा लो !
यदि हाथ में दम हो ?
गम हो गम कम हो
कैसे भूल जाऊं तुम !
धूर्त नहीं हो आज के
पागल बनाने वाले देश को !
अब कहाँ ले जाओगे ?
इस धार्मिक देश को !
हिन्दू को ब्राह्मण बनाओ
ब्राह्मण को शूद्र कहो !
ब्राह्मणो को छोड़कर !
सच के साथ हो या
झूठ के !
-डॉ लाल रत्नाकर

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