धंधे में जो अंधा है
वह कौन बहादुर बंदा है
आओ उसके बारे में
चर्चा और परिचर्चा करें ।
डरो नहीं मरो नहीं,
ज़िंदा रहकर लड़ो नहीं !
गफलत में तुम पड़ो नहीं,
बेईमानी की राह पर चलते रहो
राह बदलने को हम नहीं कह रहे
चलते रहो, चलते रहो !
कहॉ तक चलोगे !
जब ऊपर चले जाओगे !
सब यहीं पर रह जाएगा।
तुम्हें कोई याद भी नहीं करेगा !
क्योंकि याद के लिए!
फ़ॉर्मूले पुराने हैं !
चरित्र
ईमानदारी
कर्तव्य परायणता
निष्ठा
सत्य!
शांति,
सहयोग और
मानवीय सहायता
मनुष्यता
का सम्मान करता है।
बेईमानी की राह पर चलते रहो
राह बदलने को हम नहीं कह रहे
चलते रहो, चलते रहो !
कहॉ तक चलोगे !
-डॉ. लाल रत्नाकर

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