बुधवार, 19 अगस्त 2026

एक झूठे आख्यान को


एक झूठे आख्यान को 
सुनते सुनते दिल भर गया है 
हर बार वह वही सुनाता है।
कभी इसके बहाने से। 
कभी उसके बहाने से? 
किसको किसको वह
गालियां दे जाता है ।
लोग बहुत प्रेम से सुनते हैं। 
कुछ लोग तो तालियां भी बजाते हैं। 
जो लोग तालियां बजाते हैं। 
वह जानते हैं कि वह इमानदारी से
संविधान के खिलाफ अड़ा है 
और मनु के पक्ष में खड़ा है।
मनु हमारे समाज को छिन्न भिन्न 
करके खंड-खंड कर रखा है। 
आज से नहीं हजारों साल से। 
जिसे अंबेडकर ने चुनौती दी थी 
और हमारा संविधान ।
उसी बाबा की सोच का कवच है।
जिसे वह समाप्त करने की 
हमेशा बात करता है।
संविधान की कसम खाकर। 
उसी झूठे आख्यान को।
वह बार-बार सुनाता है।

-डॉ लाल रत्नाकर 

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