सोमवार, 14 सितंबर 2026

यह चिंता कितनी वाजिब है


यह चिंता कितनी वाजिब है 
यही निरंतर चिंतित किए रहती है 
इधर कुछ दिनों से बहुत सारी चिंताओं में :
एक प्रमुख चिंता है 
आने वाले 2027 के 
उत्तर प्रदेश के चुनाव की।
कुछ लोग सरकार बना रहे हैं। 
जो सरकार में बैठे हुए हैं 
वह अपनी सरकार बनाए रखने की 
पूरी ताकत से प्रदेश में 
विविध जज्बात को बढाए हुए हैं।
इधर युवराजों की फौज !
अपने लोगों को ही रौंद रही है।
मगर हमारी चिंता में युवराज नहीं है। 
क्योंकि लोकतंत्र में युवराज नहीं हुआ करते। 
लोकतंत्र में सेवक होते हैं। 
सेवक के साथ साथ 
जनसेवक भी कहे जा सकते हैं। 
लेकिन युवराज बनाकर 
संविधान को धता बताना है।
लोकतंत्र की मर्यादा बचाना है। 
आगामी चुनाव निष्पक्ष कराना है। 
क्योंकि मध्य प्रदेश, हरियाणा 
महाराष्ट्र बिहार और बंगाल।
बाकी के तो और राज्य हैं? 
लेकिन उनके अनुभव 
लोकतंत्र पर प्रश्न चिन्ह लगाते हैं ?
चुनाव आयोग और उसके क्रियाकलाप ? 
न्यायालय और उनकी चिंता? 
रात दिन यह सवाल खड़ा करती है। 
उत्तर प्रदेश का चुनाव निष्पक्ष होगा। 
हो भी सकता है। 
यदि योगी को हटाना होगा। 
और देश को बताना होगा? 
कि अभी चुनाव निष्पक्ष होते हैं। 
चुनाव आयोग में बैठे ज्ञानेश। 
अब वह ज्ञानेश नहीं है जिन पर। 
पक्षपात का आरोप लगता है। 
नाम तो मेरा भी एक ही जगह है। 
पता नहीं नई लिस्ट आएगी? 
तो उसमें होगा कि नहीं? 
क्योंकि नाम काटने की प्रक्रिया। 
प्रक्रियागत तरीके से 
चक्कर काट रहा है ?
कार्यकर्ता बम बम कर रहा है।

-डाॅ.लाल रत्नाकर

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