हमें नहीं पता कल क्या होगा ?
शायद आपको पता हो ?
सारे परदे हटा दिए गए हैं
मर्यादा के, नैतिकता के, संविधान और
लोकतंत्र के ?
तत्कालीन व्यवस्था से
अखंड पाखण्ड में
धकेल दिया गया है मुल्क को !
उनकी पूजा हो रही है
जिन्होंने नैतिकता को
चरित्र और शालीनता के
सारे मानदंड तोड़ दिए हैं
समाज की नज़रों में !
न्याय सांगत नहीं है
उसका शासन उसका आचरण ?
पर आज वही पूज्य्नीय है
क्योंकि उनके लिए ?
पर उनके लिए क्यों ?
जिनका वह नाश किया है !
नाश कर रहा है !
यही वक़्त की हकीकत है।
शायद यही नया भारत है !
-डॉ लाल रत्नाकर

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