उसने !
फोन करना ही बंद कर दिया।
इससे पहले भी !
कई बार बंद किया था।
पर फिर करने लगा था।
उससे फोन पर जो जो ....
बातें होती हैं।
उसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता?
बहुत सारे लोग उसकी बातें सुनकर !
होशो हवास खो देते हैं।
और उसके मुरीद हो जाते हैं।
मैंने उसे बार-बार कहा है।
और ऐसा आदमी!
जो आदमी को आदमी ही...
समझता है।
वह बार-बार यह ?
समझाने की कोशिश करता है!
हर आदमी !
आदमी नहीं होता?
आदमी के रूप में उसके कथनानुसार !
जो जो होता है ?
उसे सार्वजनिक !
नहीं किया जा सकता!
फिर भी वह जब फोन करता है!
जब वह फोन करता था!
तब मुझे उसकी !
वही प्रवृत्ति स्मरण हो आती थी !
या तो यह आदमी नहीं है?
या उस आदमी की तरह है ?
जिसे वह जो जो नाम देता है।
या देता रहता है !
मैं छांट नहीं पाता कि ?
इस बार उसे किस वर्ग में रखूं।
फिर भी जब बात खत्म होती है।
तो काफी राहत होती है।
इसलिए फोन करने की सावधानी।
के चक्कर में फोन करना ही।
कम होता जा रहा है।
अब तो वह लोग भी फोन नहीं करते !
जो दिन में कई बार किया करते थे।
सुबह शाम तो करते ही थे।
कई बार उसकी बात सही लगती है।
लेकिन अक्सर गलत लगती है।
सबसे गलत तब लगी थी।
जब वह नए-नए संबंध !
गढ़ रहा था।
और पुराने संबंधियों को?
न जाने क्या समझ रहा था?
काश वह अब फोन
बंद ही रखता।
क्योंकि अब डर लगता है।
कहीं उसका फोन फिर न आ जाए !
-डॉ लाल रत्नाकर

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