बंगाल की अपनी संस्कृति है
अन्य प्रदेशों के शातिर से शातिर ठग
वहॉ सफल नहीं हो सकते ?
क्या है किसी भी पार्टी की मानसिकता!
ज़रूरी नहीं है वह जो कुछ कह रही है।
कितना भरोसा किया जा सकता है।
जिसकी मानसिकता ही विश्वासघाती है।
जनता यह जानती तो है पर मानती कहाँ है।
उनका कोई हक ही नहीं बनता ।
वह लोकतंत्र को नहीं मानते ?
चुनाव में वह नहीं केंचुआ लड़ रहा है
एक एकेली महिला ललकार रही है !
पूरा मुल्क दुत्कार रहा है ।
अन्य प्रदेशों के शातिर से शातिर ठग
वहॉ सफल नहीं हो सकते ?
क्या है किसी भी पार्टी की मानसिकता!
ज़रूरी नहीं है वह जो कुछ कह रही है।
कितना भरोसा किया जा सकता है।
जिसकी मानसिकता ही विश्वासघाती है।
जनता यह जानती तो है पर मानती कहाँ है।
उनका कोई हक ही नहीं बनता ।
वह लोकतंत्र को नहीं मानते ?
चुनाव में वह नहीं केंचुआ लड़ रहा है
एक एकेली महिला ललकार रही है !
पूरा मुल्क दुत्कार रहा है ।
-डॉ. लाल रत्नाकर
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