बंगाल की अपनी संस्कृति है
अन्य प्रदेशों के शातिर से शातिर ठग
वहॉ सफल नहीं हो सकते ?
अन्य प्रदेशों के शातिर से शातिर ठग
वहॉ सफल नहीं हो सकते ?
उस संस्कृति के परिवर्तन का कोई सवाल नहीं है।
क्या है किसी भी पार्टी की मानसिकता!
ज़रूरी नहीं है वह जो कुछ कह रही है।
कितना भरोसा किया जा सकता है।
जिसकी मानसिकता ही विश्वासघाती है।
जनता यह जानती तो है पर मानती कहाँ है।
उनका कोई हक ही नहीं बनता ।
क्या है किसी भी पार्टी की मानसिकता!
ज़रूरी नहीं है वह जो कुछ कह रही है।
कितना भरोसा किया जा सकता है।
जिसकी मानसिकता ही विश्वासघाती है।
जनता यह जानती तो है पर मानती कहाँ है।
उनका कोई हक ही नहीं बनता ।
जो कुछ कह रहा है उसे मानने की।
समाज में परिवर्तन की बात करने में।
क्योंकि वह लोकतंत्र को नहीं मानते ?
चुनाव में वह नहीं केंचुआ लड़ रहा है ?
क्योंकि वह लोकतंत्र को नहीं मानते ?
चुनाव में वह नहीं केंचुआ लड़ रहा है ?
एक अकेली महिला से जो चिल्ला रही है
एक अकेली महिला जो ललकार रही है !
ऐसे हालात में पूरा मुल्क दुत्कार रहा है ।
एक अकेली महिला जो ललकार रही है !
ऐसे हालात में पूरा मुल्क दुत्कार रहा है ।
पर जीत को हड़प कर जश्न मना रहा है।
सर्वत्र उसके गुंडे आग लगा रहे हैं।
बंगाल की स्मिता को मिटा रहे हैं।
क्योंकि अब तक बंगाली बंगाली था।
जिसे हिन्दू और मुसलमान बना दिया ?
जातिवाद की आग लगा दिया !

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें