मंगलवार, 14 जुलाई 2026

मौन की शक्ति बहुत तगड़ी है।


मौन की शक्ति बहुत 
तगड़ी है।
जो अपने को कहते हैं कि,
वह समझ में अगड़े हैं।
वह विचारों में बहुत पिछड़े हैं। 
मौन रहने का यह मतलब नहीं होता। 
कि हम सच से वाकिफ नहीं है। 
मगर इतनी पेचों में जकड़े हैं।
न जाने क्यों इतने
अकड़े हैं।
हो सकता है कोई नया 
राह खोज रहे हों !
जब कानून कानून की तरह 
काम नहीं करता
तब तब अवाम कानून ख़रीदती है।

- डॉ लाल रत्नाकर 

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