जो अभिशप्त हैं
अपने अपने चरम पाखंड से
अंधविश्वास और चमत्कार से।
उनको समझना और समझाना
बहुत मुश्किल है।
उनको देख करके
उनकी इच्छा का भान होता है
जब उन्हें सुन लो
तो उनके धर्म का ज्ञान होता है।
साथ-साथ अज्ञानता का भी
बेहतरीन एहसास होता है।
95% का यही हाल है ।
परिवर्तन का शंखनाद हो रहा है
लेकिन वह शंख बजाने में
मश्गूल है।
वह अभिशप्त नहीं है,
जड़ हैं चेतन से सुदूर।
महिमा - मण्डन से भरपूर !
हाँ वह अभिशप्त हैं।
-डा लाल रत्नाकर

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