शुक्रवार, 28 अप्रैल 2023

तस्वीरों का मतलब समझो !









तस्वीरों का मतलब समझो
सबको अपना साथी समझो
दुश्मन बहुत बनाया अब तक
भेदभाव अज्ञान नहीं था।
ज्ञान हमारा अहंकार था
सब कुछ सुंदर-सुंदर हमने
छोड़ा तोड़ा मन उन सबका।
होश नहीं था वक्त कहा था
सत्य असत्य का भेद कहां था
झूठे को तब भी हमने।
उसकी कीमत से ज्यादा,
मर्यादा से तौला!
निकल गया वह वक्त सुहाना
तस्वीरों से पहचाना।
कामकाज सब रोजगार थे
मजदूर नहीं समझा।
लूट रहे थे संत समझकर
जो डाकू थे अब जाना।
तस्वीरों से पहचाना।
अभी भी जितना वक्त बचा है
उसको बांधों समृद्ध तार से।
तोड़ रहा मदमस्त मुसाफिर
सदियों के अवयव को।
जिस जिस में इतिहास बचा है।
नहीं बचेगा अब इस युग में।

डॉ लाल रत्नाकर

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