शुक्रवार, 9 जनवरी 2026

ओ शहंशाह हम गुण्डे नहीं है ?












ओ शहंशाह 
हम गुण्डे नहीं है ?
हमें तुमसे डर नहीं लगता।
तुम हमसे क्यों डरते हो?
हम अवाम हैं ।
संवैधानिक लोकतांत्रिक मुल्क के।
हम बचपन से देश को
जन्नत की तरह प्यार करते हैं।
तुम शहंशाह हो।
और हड़प रहे हो मेरे मुल्क को।
किसके लिए?
तुम्हें मोहब्बत है अंधेरे से।
प्रकाश तुम्हें सुहाता नहीं है।
सुना है तुम्हें हर रंग भाता नहीं ।
सत्य तुम्हें सुहाता नहीं है।
इंसाफ में विश्वास नहीं है।
संस्थाएं सुदृढ़ हो।
यह तुम चाहते नहीं।
शहंशाह तुम।
शहंशाह कैसे हो।
तुम तो संविधान की शपथ लिए थे।
संविधान पर चलते नहीं हो।
क्या?
शहंशाह बनने के लिए !

-डॉ लाल रत्नाकर 

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