आईए अब मिलकर
नाकामियों को गले लगा लें।
अपने उन्हीं साथियों से आंखें चुरा लें।
लड़ने की हिम्मत नहीं है।
इंसाफ के लिए।
डर को गले लगा लें।
शोहरत अपनी बढ़ा लें।
नफरत को भी छुपा लें।
हिंदू मुसलमान के बीच।
कल तक यही थे ?
मेरे इतने अपने और अजीज।
आज उनसे इतनी दूरी
क्यों बढ़ा लें।
ऐसा क्यों कर रहे हो।
दूरी क्यों बढ़ा रहे हो।
यह मुल्क सब ने बनाया है।
यह क्यों भूल रहे हो।
मनुष्यता का दुश्मन ।
वो सदियों से रहा है।
सब में फूट डालकर जो लूट रहा है।
लोकतंत्र के लिए !
संविधान ने सब कुछ समझाया है।
यह मंत्र बताया है।
इसीलिए संविधान ही धर्म हमारा है।
यह तय करना होगा।
हिंदू मुस्लिम सभी बचेंगे।
जब यह नारा होगा।
और बहुजन की आवाज उठेगी।
भागेगा दुश्मन।
यह बिल्कुल माकूल दवा है।
हमें यही आवाज उठाना है।
यदि मुल्क बचाना है।
सबको यही समझाना है।
-डा.लाल रत्नाकर

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