बुधवार, 20 मई 2026

हम गए थे गाँव में शादी कराने को !

 
हम गए थे गाँव में
शादी कराने को !
पहले हुआ बहुत विरोध !
फिर जब शादी हो गई।
तो सब ने माथे चढ़ा लिया!
बुड्ढे जवान सबने
अब मन बना लिया 
हम भी करेंगे शादी 
अब इसी रीति से !
न्योता मिला है ।
आगे की शादियों के लिए
सब ने महसूस किया
यह शादी बहुत भली है
न रात का झंझट है
न यजमान की ठगी है।
न पाखंड का कोई चक्कर
यहॉ सब कुछ खुला खुला है
वर वधू का प्रतिज्ञापन ।
फिर जयमाल से हो शादी
न समय की बर्बादी
न पाखंडियों की सौदेबाजी ।
संविधान की उद्देश्यिका
का वर बधू करे वाचन।
साक्षियों के समर्थन से ।
पूरी हो यह शादी।
वर वधू के हाथ में 
प्रमाण पत्र देकर ।
पूरा कर दिया है,
नव दंपति का संकल्प॥
अब वाह वाही मिल रही है।
चारों तरफ़ से खूब!
अर्जक संघ का यही है!
बहुजनों तुम्हें संदेश।
पाखंड अंधविश्वास से
बचाना है अपना परिवेश।
चमत्कारियों की यहॉ
खुल गई है अब पोल 
चारों तरफ़ बज रही
ख़ुशियों की शहनाई और ढोल।

-डॉ. लाल रत्नाकर

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