शनिवार, 16 जनवरी 2016

उस्ताद

चित्र ; डॉ.लाल रत्नाकर 


बेइंतहा उस्ताद हो गया है,
हर फसल की खाद हो गया है।

फितरत का पाठ पढ़ लिया है,
हर गाँठ का स्वाद चख लिया है।

डरता नहीं है अपराध करने से,
क्योंकि झूठा इंसाफ गढ़ लिया है।

मूर्खता का इतिहास पढ़ लिया है,
तिकड़मों का संवाद गढ़ लिया है।

आकाओं का साथ मिल गया है,
गजब का समाज मिल गया है।

-डा.लाल रत्नाकर

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